ऑब्सट्रक्टिव एज़ूस्पर्मिया
वृषण में शुक्राणु बनते हैं, लेकिन नली में रुकावट के कारण वीर्य तक नहीं पहुँचते। संक्रमण, नसबंदी, जन्म से नली का न होना या पुरानी सर्जरी इसके कारण हो सकते हैं।
पुरुष बांझपन मार्गदर्शिका
वीर्य की जाँच में शुक्राणु न मिलने की स्थिति को एज़ूस्पर्मिया (Azoospermia) कहते हैं। इसका अर्थ यह नहीं कि जैविक पिता बनना हमेशा असंभव है। सही कारण पता चलने पर कुछ पुरुषों में इलाज या शुक्राणु प्राप्त करने की प्रक्रिया से संतान की संभावना हो सकती है।

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जब लैब में वीर्य के नमूने को सेंट्रीफ्यूज करने के बाद भी कोई शुक्राणु न दिखे, तो इसे एज़ूस्पर्मिया कहा जाता है। आमतौर पर केवल एक रिपोर्ट पर अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जाता; दूसरे दिन दोबारा वीर्य जाँच से पुष्टि की जाती है।
अधिकांश पुरुषों में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते। गर्भधारण में देरी होने पर जाँच के दौरान इसका पता चलता है। कुछ लोगों में वीर्य की मात्रा कम होना, हार्मोन में बदलाव, वृषण का आकार छोटा होना या पहले हुई सर्जरी का इतिहास हो सकता है।
वृषण में शुक्राणु बनते हैं, लेकिन नली में रुकावट के कारण वीर्य तक नहीं पहुँचते। संक्रमण, नसबंदी, जन्म से नली का न होना या पुरानी सर्जरी इसके कारण हो सकते हैं।
वृषण में शुक्राणु बनना बहुत कम या बंद होता है। आनुवंशिक बदलाव, हार्मोन की समस्या, वैरिकोसील, कीमोथेरेपी या अंडकोष का नीचे न उतरना कारण हो सकते हैं।
हर व्यक्ति में कारण अलग हो सकता है। विशेषज्ञ जाँच के बिना दवा या सप्लीमेंट शुरू न करें।
शुक्रवाहिनी में रुकावट या जन्मजात कमी
हार्मोन की कमी या पिट्यूटरी ग्रंथि की समस्या
Klinefelter syndrome या Y-chromosome microdeletion जैसे आनुवंशिक कारण
वैरिकोसील, मम्प्स ऑर्काइटिस या अन्य संक्रमण
कीमोथेरेपी, रेडिएशन या कुछ दवाएँ
नसबंदी, हर्निया या प्रजनन अंगों की पुरानी सर्जरी
रुकावट है या शुक्राणु उत्पादन कम है—यह समझना सही इलाज चुनने के लिए जरूरी है।
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अलग-अलग दिनों के नमूनों में शुक्राणु न होने की पुष्टि की जाती है।
2
वृषण का आकार, वैरिकोसील, पुरानी बीमारी, दवाएँ और सर्जरी की जानकारी देखी जाती है।
3
FSH, LH, testosterone की जाँच; जरूरत होने पर scrotal ultrasound.
4
चुने हुए मरीजों में karyotype, Y-chromosome microdeletion या CFTR जाँच की सलाह दी जा सकती है।
हर व्यक्ति के लिए एक जैसा इलाज नहीं होता। कारण, हार्मोन, आनुवंशिक रिपोर्ट और महिला साथी के अंडों की स्थिति देखकर योजना बनाई जाती है।
कुछ खास हार्मोन की कमी में दवाओं से शुक्राणु उत्पादन बढ़ाने का प्रयास किया जा सकता है।
कुछ obstructive मामलों में नली को दोबारा जोड़ने या रुकावट ठीक करने पर विचार किया जा सकता है।
वृषण या epididymis से सुई के जरिए शुक्राणु प्राप्त करने की कम आक्रामक प्रक्रियाएँ; आमतौर पर IVF-ICSI के साथ उपयोग होती हैं।
Non-obstructive azoospermia में माइक्रोस्कोप की मदद से शुक्राणु मिलने की संभावना वाले ऊतक को चुनकर निकालने की सर्जरी।
कई पुरुषों में संभावना रहती है। रुकावट वाले एज़ूस्पर्मिया में शुक्राणु मिलने की संभावना आमतौर पर अधिक होती है। कम उत्पादन वाले कुछ पुरुषों में भी Micro-TESE से शुक्राणु मिल सकते हैं।
प्राप्त शुक्राणु को IVF-ICSI में अंडे के अंदर डाला जाता है। अंतिम संभावना पुरुष के कारण के साथ महिला साथी की उम्र, अंडे की गुणवत्ता और गर्भाशय की स्थिति पर भी निर्भर करती है।
Iswarya Fertility की डॉक्टर टीम पुरुष बांझपन, एज़ूस्पर्मिया, शुक्राणु प्राप्त करने की प्रक्रियाओं और IVF-ICSI के लिए समन्वित देखभाल देती है। डॉक्टरों की प्रोफाइल देखें और अपने लिए उपयुक्त विशेषज्ञ से परामर्श बुक करें।
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वीर्य जाँच, हार्मोन या आनुवंशिक रिपोर्ट हो तो साथ लाएँ। नजदीकी Iswarya केंद्र में हिन्दी परामर्श बुक करें।
यह कारण पर निर्भर करता है। हार्मोन की कमी या कुछ रुकावटों का इलाज संभव है। अन्य स्थितियों में TESA, PESA या Micro-TESE से शुक्राणु प्राप्त कर IVF-ICSI किया जा सकता है।
आमतौर पर नहीं। शुक्राणु न होने की पुष्टि के लिए दूसरे दिन दोबारा जाँच की जाती है।
हार्मोन से जुड़ी कुछ स्थितियों में दवा मदद कर सकती है। आनुवंशिक या गंभीर उत्पादन समस्या में केवल दवा पर्याप्त नहीं हो सकती।
नहीं। TESA में सुई से नमूना लिया जाता है। Micro-TESE में माइक्रोस्कोप की मदद से चुने हुए ऊतक को सर्जरी द्वारा निकाला जाता है।
कुछ हार्मोन परिणाम, पारिवारिक इतिहास या non-obstructive azoospermia होने पर आनुवंशिक जाँच और काउंसलिंग की सलाह दी जा सकती है।
यह जानकारी सामान्य शिक्षा के लिए है और व्यक्तिगत चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं है। उपचार के परिणाम हर व्यक्ति में अलग हो सकते हैं।